अगले दिन हम सब सुबह ६ : ०० बजे तक रामपुर से आगे जाने के लिए तैयार थे | मैं और राजेश जी को छोड़ कर बाकी सभी नहा लिए थे, परन्तु हमारा इरादा तो गौरी कुंड मैं स्नान करने का था तो इसलिए नहीं नहाये | हमने अपना सामान वहीँ कमरे मैं ही छोड़ दिया, क्योंकि हमने फैसला किया था कि रात तक केदारनाथ ज्योर्तिलिंग के दर्शन कर के वापिस आ जायेंगे | हमारी गाड़ी भी आ गयी और हम सब गाड़ी मैं बैठ कर रामपुर से आगे सोन पर्याग के लिए चल दिए | आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि सोन पर्याग से आगे जाने के लिए ONE वे TRAFIC है , हर दो घंटे बाद गाड़ियों का काफिला सोनप्रयाग से गौरी कुंड के लिए छोड़ा जाता है |
उपरोक्त सभी फोटो रामपुर के हैं |
उपरोक्त वीडियो रामपुर के कमरे से बनाया गया है |
सोन पर्याग मैं हमें कोई आधा घंटा रुकना पड़ा | वहां पर मैंने और राजेश ने गाड़ी से बाहर निकल कर प्राकृतिक सोंदर्य का आनंद लिया तथा चाय से ठण्ड को दूर किया | हमारे बाकी के साथियों ने गाड़ी से बाहर निकलना भी मुनासिभ नहीं समझा | सोन पर्याग मैं हलकी हलकी बूंदा बंदी शुरू हो गयी थी | सोन पर्याग से गोरी कुंड तक पहुँचने मैं ही करीब 8 :०० बज गए थे | मुझे और राजेश को छोड़ कर बाकी के सब साथी आगे को निकल गए | हमने गौरी कुंड मैं स्नान किया और वहीँ पर बैठ कर एक एक प्लेट मैगी की खाई |
उपरोक्त सभी फोटो गौरी कुंड के हैं |
मैं और राजेश ने सुबह 9 :०० बजे चढाई शुरू की | आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि केदारनाथ की चढाई 14 किलोमीटर है और हमने उतराई और चढाई यानी पुरे 28 किलोमीटर का सफ़र आज तय करना था | पूरी चढाई मैं प्राकृतिक सौन्दर्य देखते ही बनता था | अभी हम अर्थात मैं और राजेश करीब 4 किलोमीटर ही ऊपर चड़े थे कि हमें हमारे साथी छीनू और अनिल जी एक जगह पर आराम करते हुए मिले, जब मैंने उनसे पूछा कि बाकी के साथी कहाँ हैं तो उन्होंने कहा कि वो तो बहुत आगे निकल गए हैं | बाद मैं पता चला कि श्याम तो केदारनाथ मंदिर मैं 12 :30 बजे ही पहुँच गया था उसके बाद अनिल जी पहुंचे, आप सोच रहे होंगे कि अनिल जी तो हमें 4 किलोमीटर के बाद ही मिल गए थे तो वो कैसे इतनी जल्दी मंदिर मैं पहुँच गए | इसकी कहानी यह है कि अनिल जी से तो चढाई कि ही नहीं जा रही थी तो उन्होंने अपने लिए एक पोनी बुक कर ली थी | अतः वो करीब 1 :30 बजे तक मंदिर पहुँच गए थे | हालाँकि अमित कि तबियत ख़राब थी फिर भी वो 2 :15 बजे तक मंदिर मैं पहुँच गया था | परन्तु ज्योर्तिलिंग मैं गंगाजल चडाने का सौभाग्य तो सिर्फ श्याम और अनिल का ही था | क्योंकि 3 :०० बजे के बाद ज्योर्तिलिंग पर जल नहीं चडाया जाता | राजेश जी भी मंदिर मैं पहुँचने वालों मैं चोथे नंबर पर थे , वो करीब 4 :45 बजे मंदिर मैं पहुंचे थे | उनकी हिम्मत कि दाद देनी पड़ेगी , उन्होंने वहां मंदिर के नीचे भागीरथी के ठन्डे जल मैं एक बार फिर स्नान किया था , उसके बाद वो मंदिर मैं शिवलिंग के दर्शन के लिए गए थे | मैं और छीनू सबसे आखिर में मंदिर पहुंचे | मेरे मंदिर में देरी से पहुँचने का कारन तो मेरे द्वारा उठाया गया 15 किलो का बैग था परन्तु छीनू से तो चला ही नहीं जा रहा था | मंदिर से करीब एक किलोमीटर पहले ही मेरी और छीनू कि हिम्मत ख़तम हो गयी थी और हम पोनी वालों से बात भी करने लग पड़े थे | परन्तु शिव शंकर को यह मंजूर नहीं था कि हम पोनी में बैठ कर उनके दर्शनों के लिए आयें, तो उन्होंने हमारी हिम्मत बड़ाने के लिए उ.प. के एक किसान को भेज दिया, अब उस किसान ने हमें क्या-क्या बातें सुनायी होंगी आप तो बस उनका सिर्फ अंदाजा लगायें कि हम फिर से पैदल ही मंदिर जाने के लिए तैयार हो गए | हम दोनों शाम को 5 :15 बजे मंदिर में पहुंचे और ज्योर्तिलिंग के दर्शन किये | वहां पर हमीं हमारे बाकी के साथी हमारा इंतजार करते हुए मिल गए , राजेश तो अभी दर्शन के लिए लाइन में ही लगा हुआ था | पर शिव शंकर ने भी हमें निराश नहीं किया और हमने भी ज्योर्तिलिंग के दिल भर कर दर्शन किये |
उपरोक्त सभी फोटो गौरी कुंड से लेकर केदारनाथ मंदिर कि चढाई के दोरान लिए गए हैं |
उपरोक्त सभी फोटो केदारनाथ मंदिर के हैं |
सभी ने ज्योर्तिलिंग के दर्शन किये , पर मेरा मन तो ज्योर्तिलिंग पर गंगा जल चडाने का भी था पर उसके लिए रात को हमें मंदिर के पास ही रुकना पड़ता और उसके लिए कोई भी तैयार नहीं था | चलो कोई बात नहीं अगर शिव शंकर ने फिर कभी बुलाया तो ज्योर्तिलिंग पर जल जरुर डालूँगा | सभी ने वापिस गौरी कुंड के लिए उतराई शुरू कि तो सब गौरी कुंड तक रात को 11 :०० बजे तक पहुँच गए | सिर्फ अनिल जी छोड़ कर किसी ने भी चढाई -उतराई में पोनी नहीं लिया था | अनिल जी ने तो उतराई में भी पोनी करने में ही अपनी भलाई समझी | वैसे अगर आप केदारनाथ जाएँ तो शाम को कभी भी उतराई न करें क्योंकि पुरे रास्ते में बिजली नहीं है अगर है भी तो नाम मात्र के लिए | यह तो हम ही जानते हैं कि हमने रात को उतराई कैसे की | इस का नतीजा यह निकला कि हमें गौरी कुंड में भी एक कमरा लेना पड़ा , जबकि हमारा प्रोग्राम तो रामपुर में जा कर अपने पहले से ही बुक कमरे में जा कर आराम करने का था | तो एक अतिरिक्त कमरे का किराया हमारे ऊपर पड़ गया | यहाँ पर हमारा गाड़ी का ड्राईवर भी कुछ हद तक जिम्मेदार था , अगर वो हमें कल रात को ही गौरी कुंड पहुंचा देता तो हमें दो कमरों का किराया नहीं देना पड़ता क्योंकि हमें रामपुर में रुकने के लिए ड्राईवर ने ही राय दी थी और हम ठहरे पहली बार उतराखंड में केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले | हमें तो कोई मार्गदर्शक ही नहीं मिला था जो कि हमें बताता कि पूरी तीर्थ यात्रा का कार्यकर्म कैसी बनाना है | हालाँकि मैंने और राजेश जी ने इन्टरनेट से जितनी ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिल सकती थी ले ली थी, फिर भी जो कम करने के बाद आता है वो बिना किये कैसे आ सकता है | चलो अब तो हमें नीरज जाट और संदीप पवार जी कि ब्लॉग मिल गए हैं जिससे कि हम अपनी अगली यात्राओं कि तैयारी आसानी से कर सकते हैं |
अगले अंक में आपको बद्रीनाथ जी कि यात्रा पर ले चलेंगे...................


































