Tuesday, November 8, 2011

केदारनाथ के दर्शन भाग -3

अगले दिन हम सब सुबह ६ : ०० बजे तक रामपुर से आगे जाने के लिए तैयार थे | मैं और राजेश जी को छोड़ कर बाकी सभी नहा लिए थे,  परन्तु हमारा इरादा तो गौरी  कुंड मैं स्नान करने का था तो इसलिए नहीं नहाये | हमने अपना सामान वहीँ कमरे मैं ही छोड़ दिया, क्योंकि हमने फैसला किया था कि रात तक केदारनाथ ज्योर्तिलिंग के दर्शन कर के वापिस आ जायेंगे | हमारी गाड़ी भी आ गयी और हम सब गाड़ी मैं बैठ कर रामपुर से आगे सोन पर्याग  के लिए चल दिए | आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि सोन पर्याग से आगे जाने के लिए ONE   वे TRAFIC है , हर दो घंटे बाद गाड़ियों का काफिला सोनप्रयाग से गौरी कुंड के लिए छोड़ा जाता है |





उपरोक्त सभी फोटो रामपुर के हैं |


उपरोक्त वीडियो रामपुर के कमरे से बनाया गया है | 

सोन पर्याग मैं हमें कोई आधा घंटा रुकना पड़ा | वहां पर मैंने और राजेश ने गाड़ी से बाहर निकल कर प्राकृतिक सोंदर्य का आनंद लिया तथा चाय से ठण्ड को दूर किया | हमारे बाकी के साथियों ने गाड़ी से बाहर निकलना भी मुनासिभ नहीं समझा | सोन पर्याग मैं हलकी हलकी बूंदा बंदी शुरू हो गयी थी |  सोन पर्याग से गोरी कुंड तक पहुँचने मैं ही करीब 8 :०० बज गए थे | मुझे और राजेश को छोड़ कर बाकी के सब साथी आगे को निकल गए | हमने गौरी कुंड मैं स्नान किया और वहीँ पर बैठ कर एक एक प्लेट मैगी की  खाई |





उपरोक्त सभी फोटो गौरी कुंड के हैं |
मैं और राजेश ने सुबह 9 :०० बजे चढाई शुरू की | आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि केदारनाथ की  चढाई 14 किलोमीटर है और हमने उतराई और चढाई यानी पुरे 28 किलोमीटर का सफ़र आज तय करना था | पूरी चढाई मैं प्राकृतिक सौन्दर्य देखते ही बनता था | अभी हम अर्थात मैं और राजेश करीब 4  किलोमीटर ही ऊपर चड़े थे कि हमें हमारे साथी छीनू और अनिल जी एक जगह पर आराम करते हुए मिले, जब मैंने उनसे पूछा कि बाकी के साथी कहाँ हैं तो उन्होंने कहा कि वो तो बहुत आगे निकल गए हैं | बाद मैं पता चला कि श्याम तो केदारनाथ मंदिर मैं 12 :30 बजे ही पहुँच गया था  उसके बाद अनिल जी पहुंचे, आप सोच रहे होंगे कि अनिल जी तो हमें 4 किलोमीटर के बाद ही मिल गए थे तो वो कैसे इतनी जल्दी मंदिर मैं पहुँच गए | इसकी कहानी यह है कि अनिल जी से तो चढाई कि ही नहीं जा रही थी तो उन्होंने अपने लिए एक पोनी बुक कर ली थी | अतः वो करीब 1 :30  बजे तक मंदिर पहुँच गए थे | हालाँकि अमित कि तबियत ख़राब थी फिर भी वो 2 :15 बजे तक मंदिर मैं पहुँच गया था | परन्तु ज्योर्तिलिंग मैं गंगाजल चडाने का सौभाग्य तो सिर्फ श्याम और अनिल का ही था | क्योंकि 3 :०० बजे के बाद ज्योर्तिलिंग पर जल नहीं चडाया जाता | राजेश जी भी मंदिर मैं पहुँचने वालों मैं चोथे नंबर पर थे , वो करीब 4 :45  बजे मंदिर मैं पहुंचे थे | उनकी हिम्मत कि दाद देनी पड़ेगी , उन्होंने वहां मंदिर के नीचे भागीरथी के ठन्डे जल मैं एक बार फिर स्नान किया था , उसके बाद वो  मंदिर मैं शिवलिंग के दर्शन के लिए गए थे | मैं और छीनू सबसे आखिर में मंदिर पहुंचे | मेरे मंदिर में देरी  से पहुँचने का कारन तो मेरे द्वारा उठाया गया 15  किलो का बैग था परन्तु छीनू से तो चला ही नहीं जा रहा था | मंदिर से करीब एक किलोमीटर पहले ही मेरी और छीनू कि हिम्मत ख़तम हो गयी थी और हम पोनी वालों से बात भी करने लग पड़े थे | परन्तु शिव शंकर को  यह मंजूर नहीं था कि हम पोनी में बैठ कर उनके दर्शनों के लिए आयें, तो उन्होंने हमारी हिम्मत बड़ाने के लिए  उ.प.  के एक किसान को भेज दिया, अब उस किसान ने हमें क्या-क्या बातें सुनायी होंगी आप तो बस उनका सिर्फ अंदाजा लगायें कि हम फिर से पैदल ही मंदिर जाने के लिए तैयार हो गए | हम दोनों शाम को 5 :15  बजे मंदिर में पहुंचे और ज्योर्तिलिंग के दर्शन किये | वहां पर हमीं हमारे बाकी के साथी हमारा इंतजार करते हुए मिल गए , राजेश तो अभी दर्शन के लिए लाइन में ही लगा हुआ था | पर शिव शंकर ने भी हमें निराश नहीं किया और हमने भी ज्योर्तिलिंग के दिल भर कर दर्शन किये | 










उपरोक्त सभी फोटो गौरी कुंड से लेकर केदारनाथ मंदिर कि चढाई के दोरान लिए गए हैं |






उपरोक्त सभी फोटो केदारनाथ मंदिर के हैं |

सभी ने ज्योर्तिलिंग के दर्शन किये , पर मेरा मन तो ज्योर्तिलिंग पर गंगा जल चडाने का भी था पर उसके लिए रात को हमें मंदिर के पास ही रुकना पड़ता और उसके लिए कोई भी तैयार नहीं था | चलो कोई बात नहीं अगर शिव शंकर ने फिर कभी बुलाया तो ज्योर्तिलिंग पर जल जरुर डालूँगा | सभी ने वापिस गौरी कुंड के लिए उतराई शुरू कि तो सब गौरी कुंड तक रात को 11 :०० बजे तक पहुँच गए | सिर्फ अनिल जी छोड़ कर किसी ने भी चढाई -उतराई में पोनी नहीं लिया था | अनिल जी ने तो उतराई में भी पोनी करने में ही अपनी भलाई समझी | वैसे अगर आप केदारनाथ जाएँ तो शाम को कभी भी उतराई न करें क्योंकि पुरे रास्ते में बिजली नहीं है अगर है भी तो नाम मात्र के लिए | यह तो हम ही जानते हैं कि हमने रात को  उतराई कैसे की | इस का नतीजा यह निकला कि हमें गौरी कुंड में भी एक कमरा लेना पड़ा , जबकि हमारा प्रोग्राम तो रामपुर में जा कर अपने पहले से ही  बुक कमरे में जा कर आराम करने का था | तो एक अतिरिक्त कमरे का किराया हमारे ऊपर पड़ गया | यहाँ पर हमारा गाड़ी का ड्राईवर भी कुछ हद तक जिम्मेदार था , अगर वो हमें कल रात को ही गौरी कुंड पहुंचा देता तो हमें दो कमरों का किराया नहीं देना पड़ता क्योंकि हमें रामपुर में रुकने के लिए ड्राईवर ने ही राय दी थी और हम ठहरे पहली बार उतराखंड में केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले | हमें तो कोई मार्गदर्शक ही नहीं मिला था जो कि हमें बताता कि पूरी तीर्थ यात्रा का कार्यकर्म कैसी बनाना है | हालाँकि मैंने और राजेश जी ने इन्टरनेट से जितनी ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिल सकती थी ले ली थी, फिर भी जो कम करने के बाद आता है वो बिना किये कैसे आ सकता है | चलो अब तो हमें नीरज जाट और संदीप पवार जी कि ब्लॉग मिल गए हैं जिससे कि हम अपनी अगली यात्राओं कि तैयारी आसानी से कर सकते हैं | 

अगले अंक में आपको बद्रीनाथ जी कि यात्रा पर ले चलेंगे...................







Friday, October 21, 2011

केदारनाथ के दर्शन भाग -2

हमारा इरादा तो सुबह ४ बजे  गंगा जी की दर्शन करने का था | पर हमारा एक साथी सुमित उर्फ छीनू बहुत ही सुस्त आदमी था उसको उठाने के लिए तो एक आदमी रखना चाहिए था | चलो कोई बात नहीं , उसे उठाते उठाते ही सुबह के ५:०० बज गए और हमारा गंगा मैया की आरती देखने का जो इरादा था वोह लटक कर रह गया | फिर भी सभी ने ७.०० बजे तक गंगा जी मैं स्नान कर लिया था | हमने हरिद्वार से ही एक जीप किराये पर ले ली थी  केदारनाथ और बद्रीनाथ जी के लिए | सभी बाल्मीकि चौक पर पहुँच गए जहाँ पर कि हमारा ड्राईवर हमारी पर्तीक्षा  कर रहा था | हम सभी ९.०० बजे तक अपनी जीप में थे | देहरादून से कुछ आगे जा कर हमने अपना नाश्ता किया सभी ने पूरी और छोल्ले खाए और आगे कि यात्रा के लिए तैयार हो गए | हम सभ में मुझे छोड़ कर सभी पहाड़ी सफ़र बहुत आराम से कर लेते हैं मतलब कि उनको उलटी बगेरह नहीं आत्ती | हमारे साथी अमित कुमार, श्याम सुंदर, अनिल मेहरा, छीनू , राजेश कुमार सभी पहाड़ी सफ़र बड़े ही आराम से कर लेते हैं | इसलिए  मैंने  तो अपना इंतजाम मतलब AVOMINE  गोली तो हरिद्वार में जीप में चड़ने से पहले ही खा ली थी | और पुरे रस्ते में कुदरत की सुन्दरता का आनंद लेते हुए जा रहे थे | परन्तु ये क्या , नाश्ता करने के बाद और जीप के चलने के साथ ही पहले अनिल मेहरा जी की हालत ख़राब हुई  फिर उनको देखकर मेरे भाई श्याम सुंदर , अमित कुमार की भी हालत ख़राब हो गयी | सभी को खाने के लिए AVOMINE  गोली दी गयी | एक अमित कुमार को छोड़ कर सभी ठीक हो गए पर अमित कुमार की जो हालत ख़राब हुई वोह बद्रीनाथ से वापिस आने के बाद ही ठीक हो पाई | यहाँ पर मैं आपको एक जानकारी देना चाहूँगा की अमित कुमार, श्याम सुंदर और छीनू अमर नाथ की यात्रा ५-६ बार कर चुके हैं जबकि मैं , राजेश कुमार और अनिल मेहरा इस तेरह के पहाड़ी सफ़र मैं पहली बार जा रहे थे | वो कहते हैं न की भगवान किसी का अहंकार नहीं रहने देते उसको तोड़ कर ही रहते हैं तो इस सफ़र मैं उन्होंने अमित कुमार  का अहंकार तोड़ दिया | क्योंकि वो यात्रा मैं जाने से पहले ही मेरी और राजेश कुमार की फिटनेस को लेकर मजाक उड़ा  रहा था कि हमसे यात्रा ठीक से नहीं होगी |  रास्ते मैं ड्राईवर ने एक जगह गाड़ी को रोक कर हमें कुदरत की खूबसूरती के दर्शन कराये | आप भी इन तस्वीरों मैं कुदरत का आनंद लीजिये :- 





इसके आगे जाकर देव प्रयाग आ गया जहाँ की अलकनंदा और भगीरथी मिलती हैं और इसी के आगे  हम इसको गंगा माता कहकर पुकारते हैं |



ये हैं अनिल मेहरा जी जो कि मेरी और मैं उनकी फोटो ले रह हूँ |


यह है देव प्रयाग :-






देव प्रयाग के दर्शन करने के बाद हम आगे के सफ़र के लिए तैयार हो गए | एक ढाबा देख कर लंच किया गया और आगे के लिए फिर हमारा सफ़र शुरू हो गया  | कुछ आगे जा कर भागीरथी के किनारे किनारे हमारे ड्राईवर ने फिर गाडी रोक दी ताकि हम कुदरत का आनंद ले सकें | हम भी कहाँ कम थे हमने भी आम ले रखे थे और सोच लिया था कि भागीरथी के ठंडे पानी मैं आमों को ठंडा कर के खायेंगे | हमारे राजेश कुमार जी कुछ ज्यादा ही जोश मैं आ गए और कूद पड़े नहाने के लिए | देखिये तस्वीरें :- 




आज हम राम नगर मैं ही रुके | एक कमरा किराये पर लिया ४ बिस्तर लगे थे और ठण्ड भी हो गयी थी तो सभी रत का खाना खाने के बाद सो गए | 

अगले अंक मैं आपको शिव के धाम केदारनाथ ले चलेंगे......





Friday, October 7, 2011

KEDARNATH KE DARSHAN

HI FRIENDS 

I AM RAMAN KUMAR. FROM THE GRACE OF GOD I HAVE VISITED KEDARNATH ON 27.06.2011. KEDARNATH IS A JYORTILINGA AMONGUST THE TWELVE JYORTILINGA. IT IS MADE BY THE PANDWAS. THE STORY BEHIND THIS IS GIVEN TO YOU SOME ANOTHER TIME. I HAVE VISITED THERE WITH MY BROTHER SHAM, AND TWO COUSINS I.E. RAJESH KUMAR & AMIT KUMAR AND TWO FRIENDS CHINKU & SONU. WE HAVE ENJOYED EVERY MOMENT OF OUR JOURNEY. WE DEPARTED FROM AMRITSAR ON 24.06.2011 BY JAN SHATABDI EXPRESS ON 6.20 A.M. & REACHED HARIDWAR BY 2.00 P.M. THERE WE TAKE BATH IN HOLY GANGA & LISTEN GANGA ARTI. ENJOYED THE PICTURES OF HARIDWAR......