Friday, October 21, 2011

केदारनाथ के दर्शन भाग -2

हमारा इरादा तो सुबह ४ बजे  गंगा जी की दर्शन करने का था | पर हमारा एक साथी सुमित उर्फ छीनू बहुत ही सुस्त आदमी था उसको उठाने के लिए तो एक आदमी रखना चाहिए था | चलो कोई बात नहीं , उसे उठाते उठाते ही सुबह के ५:०० बज गए और हमारा गंगा मैया की आरती देखने का जो इरादा था वोह लटक कर रह गया | फिर भी सभी ने ७.०० बजे तक गंगा जी मैं स्नान कर लिया था | हमने हरिद्वार से ही एक जीप किराये पर ले ली थी  केदारनाथ और बद्रीनाथ जी के लिए | सभी बाल्मीकि चौक पर पहुँच गए जहाँ पर कि हमारा ड्राईवर हमारी पर्तीक्षा  कर रहा था | हम सभी ९.०० बजे तक अपनी जीप में थे | देहरादून से कुछ आगे जा कर हमने अपना नाश्ता किया सभी ने पूरी और छोल्ले खाए और आगे कि यात्रा के लिए तैयार हो गए | हम सभ में मुझे छोड़ कर सभी पहाड़ी सफ़र बहुत आराम से कर लेते हैं मतलब कि उनको उलटी बगेरह नहीं आत्ती | हमारे साथी अमित कुमार, श्याम सुंदर, अनिल मेहरा, छीनू , राजेश कुमार सभी पहाड़ी सफ़र बड़े ही आराम से कर लेते हैं | इसलिए  मैंने  तो अपना इंतजाम मतलब AVOMINE  गोली तो हरिद्वार में जीप में चड़ने से पहले ही खा ली थी | और पुरे रस्ते में कुदरत की सुन्दरता का आनंद लेते हुए जा रहे थे | परन्तु ये क्या , नाश्ता करने के बाद और जीप के चलने के साथ ही पहले अनिल मेहरा जी की हालत ख़राब हुई  फिर उनको देखकर मेरे भाई श्याम सुंदर , अमित कुमार की भी हालत ख़राब हो गयी | सभी को खाने के लिए AVOMINE  गोली दी गयी | एक अमित कुमार को छोड़ कर सभी ठीक हो गए पर अमित कुमार की जो हालत ख़राब हुई वोह बद्रीनाथ से वापिस आने के बाद ही ठीक हो पाई | यहाँ पर मैं आपको एक जानकारी देना चाहूँगा की अमित कुमार, श्याम सुंदर और छीनू अमर नाथ की यात्रा ५-६ बार कर चुके हैं जबकि मैं , राजेश कुमार और अनिल मेहरा इस तेरह के पहाड़ी सफ़र मैं पहली बार जा रहे थे | वो कहते हैं न की भगवान किसी का अहंकार नहीं रहने देते उसको तोड़ कर ही रहते हैं तो इस सफ़र मैं उन्होंने अमित कुमार  का अहंकार तोड़ दिया | क्योंकि वो यात्रा मैं जाने से पहले ही मेरी और राजेश कुमार की फिटनेस को लेकर मजाक उड़ा  रहा था कि हमसे यात्रा ठीक से नहीं होगी |  रास्ते मैं ड्राईवर ने एक जगह गाड़ी को रोक कर हमें कुदरत की खूबसूरती के दर्शन कराये | आप भी इन तस्वीरों मैं कुदरत का आनंद लीजिये :- 





इसके आगे जाकर देव प्रयाग आ गया जहाँ की अलकनंदा और भगीरथी मिलती हैं और इसी के आगे  हम इसको गंगा माता कहकर पुकारते हैं |



ये हैं अनिल मेहरा जी जो कि मेरी और मैं उनकी फोटो ले रह हूँ |


यह है देव प्रयाग :-






देव प्रयाग के दर्शन करने के बाद हम आगे के सफ़र के लिए तैयार हो गए | एक ढाबा देख कर लंच किया गया और आगे के लिए फिर हमारा सफ़र शुरू हो गया  | कुछ आगे जा कर भागीरथी के किनारे किनारे हमारे ड्राईवर ने फिर गाडी रोक दी ताकि हम कुदरत का आनंद ले सकें | हम भी कहाँ कम थे हमने भी आम ले रखे थे और सोच लिया था कि भागीरथी के ठंडे पानी मैं आमों को ठंडा कर के खायेंगे | हमारे राजेश कुमार जी कुछ ज्यादा ही जोश मैं आ गए और कूद पड़े नहाने के लिए | देखिये तस्वीरें :- 




आज हम राम नगर मैं ही रुके | एक कमरा किराये पर लिया ४ बिस्तर लगे थे और ठण्ड भी हो गयी थी तो सभी रत का खाना खाने के बाद सो गए | 

अगले अंक मैं आपको शिव के धाम केदारनाथ ले चलेंगे......





3 comments:

  1. भाई रामनगर तो इस रुट पर नहीं आता है, आप शायद रामपुर कहना चाह रहे है जो कि सोनप्रयाग से पहले आता है।

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  2. very well said sandeep ji, it's rampur. Thanks for correcting my mistake.

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  3. अब आगे बढो, लिख भी डालो

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